जन्म का समय निर्धारण मुख्य संदेश -2

 
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सारांश

माताओं और बच्चों दोनों की सेहत के लिए जन्म के बीच कम से कम दो साल का अंतर होना चाहिए।

अगर दो बच्चों की पैदाइश के बीच दो साल से कम का अंतर है तो छोटे बच्चों की मौत का खतरा 50 गुना बढ़ जाता है।

दो साल से कम उम्र के बच्चे के स्वास्थ्य और उसकी बढ़त के लिए सबसे बड़ा खतरा नये बच्चे की पैदाइश होता है। इससे बड़े बच्चे के लिए मां का दूध पीना बहुत जल्दी रूक जाता है, और बच्चे की जरूरत के हिसाब से खासतौर पर भोजन तैयार करने के लिए मां को कम समय मिल पाता है। हो सकता है कि वह बडे बच्चे की उतनी देखभाल और ध्यान न कर सके, जितनी कि उसे जरूरत है, खासकर जब बच्चा बीमार हो। नतीजे में, दो साल या उससे अधिक समय के अंतर से पैदा हुए बच्चों के मुकाबले, दो साल से कम समय के अंतर पर पैदा हुए बच्चों का शारीरिक या मानसिक विकास आमतौर पर ठीक से नहीं हो पाता है।

गर्भधारण और प्रसव की भरपाई के लिए महिला के शरीर को दो साल की जरूरत होती है। इसलिए अगर दो जन्म के बीच का समय बहुत कम हो तो मां के स्वास्थ्य पर खतरा रहता है। दोबारा गर्भधारण से पहले मां को अपना स्वास्थ्य, पोषण की हालत और ऊर्जा को वापस पाने में समय की जरूरत होती है। पुरुषों को दो साल के अंतर पर होने वाले जन्म के महत्व को ले कर सचेत रहने और परिवार के स्वास्थ्य को बचाने में मदद करने के लिए गर्भधारण की संख्या कम करने की जरूरत है।

पिछले गर्भधारण की पूरी भरपाई से पहले अगर महिला फिर गर्भवती हो जाती है, तो इसकी बड़ी संभावना है कि उसके बच्चे की पैदाइश समय से बहुत पहले होगी और उसका वजन बहुत कम होगा। सामान्य वजन के पैदा हुए बच्चों के मुकाबले कम वजन के पैदा हुए बच्चों की सही बढ़त की संभावना कम होती है, बीमार पड़ने की ज्यादा संभावना और जीवन के पहले साल में मर जाने की संभावना चार गुना ज्यादा होगी।

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