पोषण और वृद्धि मुख्‍य संदेश-3

 
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आपदा और आपात स्थिति
सारांश

छह महीनों से दो वर्ष की आयु तक बच्‍चों को स्‍तनपान के अलावा एक दिन में पांच बार खिलाना चाहिए।

शुरुआती दो वर्षों में खराब पोषण बच्‍चे के बाकी जीवन में शारीरिक और मानसिक विकास को धीमा कर सकता है।

छोटे बच्‍चे की वृद्धि और स्‍वस्‍थ रहने के लिए पौष्टिक भोजन जैसे मांस, मछली, दालें, अनाज, अण्‍डे, फल और सब्जियों के साथ-साथ मां के दूध की भी जरूरी होती है।

एक बच्‍चे का पेट बड़े की अपेक्षा छोटा होता है क्‍योंकि वह एक बार में अधिक नहीं खा सकता, लेकिन बच्‍चे की ऊर्जा और शरीर-निर्माण की जरूरत काफी होती हैं। इसलिए यह महत्‍वपूर्ण है कि बच्‍चे को जल्‍दी उसकी खाने की जरूरतों को पूरा करना चाहिए।

जब भी संभव हो, तब बच्‍चे के भोजन में मसली हुई सब्जियां, थोड़ा सा मांस, अण्‍डे या मछली शामिल करना चाहिए। तेल की थोड़ी मात्रा भी मिलाई जा सकती है, खासकर लाल ताड़ का तेल या अन्‍य विटामिन युक्‍त तेल।

यदि भोजन सामान्‍य तरीके से बनाया हुआ हो, तो संभव है कि छोटा बच्‍चा पर्याप्‍त भोजन न लें। छोटे बच्‍चों को उनकी अपनी प्‍लेट या बाउल में खाना देना चाहिए जिससे माता-पिता या देखभाल करने वाले को पता चल सके कि उसने अपनी जरूरत के मुता‍बिक कितना खाया।

छोटे बच्‍चों को खाने के लिए प्रोत्‍साहन और खाने या बर्तन को पकड़ने में मदद की जरूरत हो सकती है। अक्षम बच्‍चे को खाने और पीने में अतिरिक्‍त मदद की जरूरत होती है।

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