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5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को रास्ते पर अधिक खतरा होता है। उनके साथ
सदा कोई न कोई होना चाहिये जो उन्हें सडक़ पर सुरक्षित चलने के तरीके समझा
सकें जिससे वे आगे चलकर सड़क पर सुरक्षित रहें
छोटे बच्चे सड़क पर दौडने से पहले सोचते नही हैं। परिवार के सदस्यों को
उनका खास ध्यान रखनी चाहिये
बच्चों को सड़क के नज़दीक नहीं खेलना चाहिये, खासकर यदि वे गेंद से खेल
रहे हो
बच्चों को सड़क के एक ओर चलना सिखाया जाना चाहिये
सडक़ पार करते समय बच्चों को सिखाएं कि वेः
- सड़क के एक ओर खडे रहें
- सड़क को पार करते समय दोनों ओर देखें
- कार या अन्य गाडियों के आवागमन पर ध्यान दें
- किसी बड़े व्यक्ति का हाथ पकड़ सड़क पार करें
- पैदल चलें, दौड़े नहीं
बड़े बच्चों को छोटे बच्चों का ध्यान रखने के लिये कहा जाना चाहिये
बड़े बच्चों में साईकिल के कारण होने वाली दुर्घटनाएं आम है। परिवार
अपने साईकिल चलाने वाले बच्चों को बचा सकते हैं यदि उन्हें सही सड़क
नियमों का ज्ञान हो। साईकिल चलाते समय बच्चों द्वारा हैलमेट या सिर की
सुरक्षा करने वाले साधन पहननी चाहिये
बच्चे यदि कार की पहली सीट पर अथवा असुरक्षित रूप से ट्रक में सफर कर
रहे हों तो वे सबसे ज्यादा असुरक्षित होते हैं
उचित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध होने तक निम्न प्राथमिक चिकित्सा को उपयोग
में लाया जाना चाहिये।
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जलने के लिये प्राथमिक चिकित्साः
- यदि बच्चे के कपड़ा में आग लगी हो तो उसे जल्दी से एक कंबल में लपेटें
अथवा ज़मीन पर लोट-पोट कर आग से बचाएं
- जले हुए हिस्से को जल्दी से ठंडा करें। काफी सारा ठंडा व साफ पानी
इस्तेमाल करें। यदि जलन ज्यादा है, तब बच्चे को किसी टब या पानी भरे हौज
में रखें। जले हुये हिस्से को ठंडा होने में आधे घन्टे का समय लग सकता
है।
- प्रभावित हिस्से को सूखा व साफ रखें तथा उसे हल्के बैंडेज से बांध
दें। यदि जलन एक सिक्के के आकार से ज्यादा है अथवा जलन से रिसाव हो रहा
है, तब बच्चे को स्वास्थ्य सहायता केन्द्र ले जाएं। यदि फफोले हो रहे हैं,
तब उन्हें फोडें नहीं। वे प्रभावित भाग की सुरक्षा के लिये होते है।
- यदि जले भाग पर कुछ चिपक गया हो तो उसे खींचे भी नही। जले हुए स्थान
पर ठंडे पानी के अलावा कुछ भी न डालें।
- बच्चे को कोई तरल जैसे पानी या फलों का रस व उसमें नमक व शक्कर डालकर
दें।
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- • यदि बच्चे को विद्युत करंट लग गया है अथवा आग पकड़ ली है, तब बच्चे
को छूने से पहले विद्युत आपूर्ति को बंद कर दें। यदि बच्चा बेहोश हो गया
है, तब उसके शरीर को गरम रखें और तुरंत चिकित्सकीय सहायता लें
- • यदि बच्चे को सांस लेने में तकलीफ हो रही है अथवा वह सांस नहीं ले
रहा है, तब उसे सीधा लिटाकर उसके मुख को थोड़ा टेढा करें। उसके नथुने
दबाकर मुंह में ज़ोर से सांस भरें। काफी ज़ोर से सांस भरें जिससे उसकी छाती
फूल सके। इसे तब तक करें जब तक बच्चा सांस नहीं लेने लगता
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- यदि चोट सिर में या मेरूदंड में है, तब वह खतरनाक हो सकती है क्योंकि
इनसे स्थायी लकवा हो सकता है अथवा ये जीवन को जोखिम में डाल सकती है। सिर
और पीठ की हलचल को नियंत्रण में लें और पीठ को किसी भी प्रकार की हलचल से
बचाएं जिससे आगे चोट न लगे।
- यदि बच्चा हिल नहीं पा रहा अथवा बहुत ज्यादा दर्द में है तो इसका मतलब
है कि उसकी हड्डी टूट गई है। प्रभावित भाग को न हिलाएं। उसे सीधा व सरल
रखें व जल्दी से चिकित्सकीय सहायता लें।
- यदि बच्चा बेहोश है, तब उसके शरीर को गरम रखें व जल्दी से चिकित्सकीय
सहायता लें
- गहरी चोट व ज़ख्मों के लिए प्रभावित भाग को ठण्डे पानी से धोएं अथवा
उसपर 15 मिनट के लिये बर्फ रखें। बर्फ को सीधे त्वचा पर नहीं रखनी चाहिये।
चोट लगे स्थान व बर्फ के मध्य एक कपड़ा रखें। 15 मिनट के बाद बर्फ हटा दें
और 15 मिनट देखें। इस प्रक्रिया को आवश्यकता पड़ने पर दोहराएं। ठंडक से
दर्द, सूजन व जख्म को ठीक होने में मदद मिलेगी।
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छोटे कटाव व छिलना
- घाव को साफ पानी व साबुन से धोएं
- घाव के आसपास की त्वचा को सुखा लें
- घाव को साफ कपड़े से ढँककर उसपर बैंडेज़ बांध दें
गहरे घावों के लियेः
- यदि घाव में कांच का टुकड़ा अथवा कोई अन्य वस्तु घुसी हुई हो तो उसे न
निकालें। संभव है कि उसके कारण जख्म दबी हुई हो व उसे निकाले जाने पर अधिक
रक्तस्राव होने लगे
- यदि बच्चे को अत्याधिक रक्तस्राव हो रहा तो प्रभावित भाग को छाती से
ऊपर रखकर घाव की उल्टी दिशा में दबाव दें। इसमें साफ कपड़े क़ा एक बंधन
बनाकर उसे खून के रूकने तक बांधा जा सकता है
- किसी प्रकार का पत्ता या अन्य लेप आदि घाव पर न लगाएं, इससे संक्रमण
हो सकता है।
- घाव पर बैंडेज बांधे। सूजन होने पर पक्का न बांधें
- बच्चे को स्वास्थ्य केन्द्र पर ले जाएं व जल्दी से चिकित्सकीय सहायता
उपलब्ध करवाएं। स्वास्थ्य कर्मचारी से पूछें कि बच्चे को टिटेनस का टीका
लग सकता है
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- यदि बच्चा खांसकर उस वस्तु को गले से बाहर निकालना चाहता है, तब उसे
परेशान न करें और ऐसा करने दे। यदि वस्तु आसानी से नहीं निकल रही हो, ऐसे
में उसे जल्दी से बच्चे के मुंह से निकालने का प्रयत्न करें
- यदि वस्तु फिर भी बच्चे के गले में फंसी रहती है, तबः
नवजात शिशु व छोटे बच्चों के लियेः
सिर व गले को सहारा दें। बच्चे के मुख को नीचे रखने का प्रयत्न करें।
कंधे के मध्य पांच बार मुक्का मारें। अब बच्चे को सीधा कर उसके छाती पर
दबाकर वस्तु को बाहर निकालने का प्रयत्न करें। इस प्रक्रिया को दो-तीन बार
दोहराएं जब तक कि फंसी हुई वस्तु बाहर नहीं निकल जाती। यदि आप इस तरीके से
वस्तु को नहीं निकाल पा रहे हैं तब जल्दी से चिकित्सकीय सहायता लें।
बड़े बच्चों के लियेः
बच्चे के पीछे खड़े रहकर उसकी छाती पर अपने हाथ रखें। अब उसे पसलियों
के पास से ज़ोर से दबाएं। पीछे से भी दबाते हुए वस्तु के बाहर निकल जाने तक
इस प्रक्रिया को दोहराएं। यदि इन प्रयासों से वस्तु बाहर नहीं निकलती है,
तब चिकित्सकीय सहायता लें।
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यदि आपको ऐसा लगता है कि बच्चे का सिर या गला क्षतिग्रस्त हुआ है, तब
उसे न हिलाएं और निम्न सावधानियों का पालन करें-
- यदि बच्चे को सांस लेने में तकलीफ हो रही है अथवा वह सही से सांस नहीं
ले पा रहा है, तब उसे सीधा लिटाकर उसके मुख को थोड़ा सा टेढ़ा करें। उसके
नथुने दबाकर मुंह में ज़ोर से सांस भरें। सांस इतनी जोर से भरें कि उसकी
छाती फूल सकें। इसे तब तक करें जब तक बच्चा सांस नहीं लेने लगता
- यदि बच्चा सांस ले रहा, लेकिन बेहोश हो तो उसे लोट पोट करें जिससे
उसकी ज़बान से सांस लेने में अवरोध न पैदा हो
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- यदि बच्चे ने ज़हर खा लिया है तब उसे उल्टी आदि करवाने का प्रयत्न न
करें, इससे बच्चा और ज्यादा बीमार हो सकता है
- यदि ज़हर बच्चे के कपड़ा या त्वचा पर है, कपड़े को ज़ल्दी से हटाएं व
काफी सारा पानी डालें। त्वचा को कई बार साबुन से साफ करें
- यदि ज़हर बच्चे की आंखों में चला गया है, तब आंखों को लगभग 10 मिनट तक
अच्छे से धोएं
- बच्चे को जल्दी से स्वास्थ्य केन्द्र या अस्पताल में लेकर जाएं। यदि
संभव हो तो जिस ज़हर का असर हुआ है, उसका कुछ अंश या उसकी बोतल साथ ले
जाएं। बच्चे को जितना हो सके उतना स्थिर और शांत रखने की कोशिश करें।
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