टीकाकरण मुख्‍य संदेश-1

 
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स्वच्छता
मलेरिया
एचआइवी/ एड्स
जख्म से बचाव
आपदा और आपात स्थिति
सारांश

टीकाकरण अनिवार्य है। हरेक बच्‍चे को अपने शुरुआती पहले वर्ष के दौरान लगातार टीके लगवाने की आवश्‍यकता होती है।

जीवन के शुरुआत में बच्‍चों का टीकाकरण करवाना आवश्‍यक होता है। कुकर खांसी से होने वाली आधे से अधिक मौतें, एक-तिहाई पोलियो के मामले और खसरे से होने वाली सभी मौतों का एक-चौथाई बच्‍चों में एक वर्ष के भीतर ही हो जाता है।

शिशुओं को सभी टीके लगवाना अति आवश्‍यक होता है- अन्यथा हो सकता है कि टीका काम न करें।

जीवन की शुरुआत के पहले वर्ष के दौरान बच्‍चे को सुरक्षित करने के लिए नीचे दिये गये चार्ट में दिखाये गये टीके लगवाना आवश्‍यक होता है। टीकाकरण तब अधिक प्रभावी होता है, जब उसे खास आयु या जितना संभव हो सके उसके आसपास करवाया गया हो।

यदि किसी कारणवश किसी बच्‍चे को पहले वर्ष में पूरे टीके नहीं लगवाये गये हों, तो यह अत्‍यन्‍त महत्‍वपूर्ण है कि जितना संभव हो सके, उतनी जल्‍दी विशेष राष्‍ट्रीय टीकाकरण दिवसों पर उसका टीकाकरण करवाएं।

कुछ देशों में पूरक टीके की खुराक जिसे 'बुस्‍टर शॉट्स' कहते हैं, शरुआती वर्ष के बाद दी जाती है। ये शॉट्स टीके से सुरक्षा को और अधिक प्रभावी बनाती हैं।

शिशु के लिए टीकाकरण अवधि

जन्‍म के समय- टीके जो दिये जाने चाहिए: बीसीजी**, पोलिया और कुछ देशों में हैपेटाइटिस बी के टीके

6 सप्ताह के होने पर जो टीके दिये जाने चाहिए: डीपीटी**, पोलियो और कुछ देशों में हैपेटाइटिस बी और हिब के टीके

10 सप्ताह के होने पर जो टीके दिये जाने चाहिए: डीपीटी, पोलियो और कुछ देशों में हैपेटाइटिस बी और हिब के टीके

14 सप्ताह के होने पर जो टीके दिये जाने चाहिए: डीपीटी, पोलियो और कुछ देशों में हैपेटाइटिस बी और हिब के टीके

9 महीने के होने पर जो टीके जो दिये जाने चाहिए: खसरा (विकसित देशों में 12-15 महीने के बीच) और कुछ देशों में पीलिया, गलसुआ (मम्प) और हल्‍का खसरा के टीके

* राष्‍ट्रीय टीकाकरण अवधि अलग-अलग देशों में कुछ आगे-पीछे हो सकती है।

** बीसीजी कुष्‍ठरोग और टीबी के कुछ रूपों से सुरक्षा प्रदान करता है; डीपीटी डिफ्थेरिया, कुकर खांसी और टिटनेस से सुरक्षा प्रदान करता है।



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