स्वच्छता मुख्य संदेश-1

 
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सारांश

सारा मल सुरक्षित रूप से दूर स्थान पर फेंक दिया जाना चाहिये। शौचकूप या शौचालय सर्वोत्तम मार्ग है।

बहुत सी बीमारियाँ, विशेषत: अतिसार (डायरिया), मानव मल में पाये जानेवाले रोगाणुओं के कारण होती हैं। यदि रोगाणु खाना, या पानी, हाथ, बर्तन, या खाना पकाने के स्थान और खाना खाने के स्थान पर पहुँच गये, तो वे मुँह के द्वारा निगले भी जा सकते हैं और इस प्रकार बीमारी फैला सकते हैं।

रोगाणुओं को फैलने से रोकने के लिये सबसे उत्तम उपाय है- सारे मल चाहे वह मानव का हो या पशुओं का सुरक्षित तरीके से फेंका जाये। मानव मल को शौचकूप या शौचालय फेंका जाना चाहिये। शौचालयों को साफ रखा जाना चाहिये। पशुओं का मल घर, रास्ते और बच्चों के खेलने के स्थान से दूर रखनी चाहिये।

यदि शौचकूप या शौचालय का प्रयोग करना संभव न हो तो, सभी को घर, रास्ते, जल के स्रोत और बच्चों के खेलने के स्थान से काफी दूर जाकर मलत्याग करनी चाहिये और मल को तुरंत मिट्टी में दबा देना चाहिये।

सभी प्रकार का मल, बिल्कुल नन्हें बच्चों का भी, रोगाणुओं का स्थानांतरण करता है और इसीलिये खतरनाक है। यदि बच्चे बिना शौचकूप या शौचालय के, लैट्रिन या पॉटी के बिना मलत्याग करें तो उनका मल तुरंत शौचकूप या शौचालय में डाल देना चाहिये या गाड़ देनी चाहिये।

लैट्रिन और शौचालय अक्सर साफ रखने चाहिये। लैट्रिन को ढ़क कर रखना चाहिये और शौचकूपों में फ्लश चला देना चाहिये। स्थानीय सरकारें और एनजीओ कम खर्च में सैनिटरी लैट्रिन बनाने के लिये सलाह देकर समुदायों की मदद कर सकती हैं।

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