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जो लोग यौन जनित संक्रमण से ग्रस्त हैं उन्हें एच.आई.वी होने
का या उनके द्वारा फैलने का अधिक खतरा है। यौन जनित संक्रमण से ग्रस्त
लोगों को चाहिये कि वे योग्य दवाइयाँ लें या सुरक्षित यौन संबंध स्थापित
करें।
यौन जनित संक्रमण, वे संक्रमण हैं जो शारीरिक संपर्क के कारण और शरीर
के द्रव पदार्थों के अदला-बदली से (वीर्य, योनिमार्ग द्रव या रक्त) या
जननांगों की त्वचा के संपर्क से (विशेषकर उस जगह पर फोड़े, किसी तरह घाव
या और कोई निशान जो यौन जनित संक्रमण के कारण होते हैं) से फैलते हैं।
यौन जनित संक्रमण गंभीर किस्म के शारीरिक नुकसान पहुँचाते हैं।
कोई भी यौन जनित संक्रमण जैसे गनोरिया या सिफलिस, एच.आई.वी के फैलने का
कारण बन सकता है। यौन जनित संक्रमण से ग्रस्त व्यक्ति यदि किसी एच.आई.वी
संक्रमित व्यक्ति से असुरक्षित सेक्स संबंध स्थापित करते हैं तो उनमें
एच.आई.वी के संक्रमण का खतरा 5 से 10 गुना अधिक होता है।
- संभोग के दौरान- जैसे वेजायनल, गुदा या मुखमैथुन के समय लेटेक्स कंडोम
का सही और निरंतर प्रयोग यौन जनित संक्रमण को बहुत हद तक कम कर देता है
जिनमें एच.आई.वी भी समाविष्ट है।
- जिन लोगों के यौन जनित संक्रमण से ग्रस्त होने की आशंका है उन्हें
स्वास्थ्य कर्मचारी से दवाइयाँ लेनी चाहिये। उन्हें यौन क्रिया कुछ दिनों
के लिए रोक देनी चाहिये या वे सुरक्षित यौन संबंध स्थापित करें
(नॉनपेनिट्रेटिव सेक्स या कंडोम के साथ सेक्स)। यौन जनित संक्रमण से
ग्रस्त लोगों को चाहिये कि वे अपने सहयोगी को उसके बारे में बता दें। यदि
दोनों ही सहयोगी को यौन जनित संक्रमण के लिये उपचारित नहीं किया गया तो,
वे दोनों ही एक-दूसरे को यौन जनित संक्रमण देते रहेंगे। अधिकतर यौन जनित
संक्रमण का इलाज संभव है।
- यौन जनित संक्रमण ग्रस्त पुरुष को मूत्र त्याग करते समय दर्द या
बेचैनी हो सकती है। उसके जननांग से द्रव्य पदार्थ निकल सकता है, फोड़े,
खुजली के निशान, छाले या स्क्रैच जैसे निशान हो सकते हैं। महिलाओं में यौन
जनित संक्रमण ग्रस्त होने पर योनि मार्ग में से एक तरल द्रव्य निकलता है
जिसमें अजीब दुर्गन्ध होती है। जननांगों के पास खुजली, रेशेज, या
योनिमार्ग से अचानक रक्त स्राव होना या संभोग के दौरान रक्त स्राव होना,
ये लक्षण दिखाई देते हैं। अधिक गंभीर संक्रमणों में बुखार, पेट में दर्द,
और बांझपन दिखाई पड़ते हैं। तथापि, बहुत सारे यौन जनित संक्रमण महिलाओं
में कोई भी लक्षण नहीं दिखाते हैं, और कई पुरुषों में भी यौन जनित संक्रमण
के कोई लक्षण नहीं दिखते हैं। साथ ही, जननांगों के आसपास की कोई भी तकलीफ
नहीं होती है। कुछ संक्रमण ऐसे हैं, जो शारीरिक संबंध स्थापित स्थापित
करने के दौरान नहीं फैलते हैं पर जननांगों के क्षेत्र में बहुत सारी तकलीफ
पहुँचाते हैं।
यौन जनित संक्रमण को जानने का परंपरागत तरीका प्रयोगशाला परीक्षणों से
होता है, तथापि, ये परीक्षण कभी-कभी बहुत ही महँगे या अनुपलब्ध होते
हैं।
1990 से विश्व स्वास्थ्य संगठन ने यौन जनित संक्रमण से ग्रस्त लोगों
में उसकी ‘सिंड्रोमिक मैनेजमेंट’ करने की सिफारिश की है। सिंड्रोमिक
मैनेजमेंट की प्रमुख विशेषताएँ हैं:
- क्लिनिकल सिंड्रोम द्वारा उत्पादित मुख्य रोगाणुओं का वर्गीकरण
- किसी विशेष सिंड्रोम का प्रबंधन करने के लिये इस वर्गीकरण से निकाले
हुये फ्लो चार्ट का प्रयोग
- सिंड्रोम के सभी महत्वपूर्ण कारणों के लिये उपचार
- सेक्स सहयोगियों को सूचित करना और उपचार
- कोई महंगी प्रयोगशाला प्रणाली नहीं
फ्लो चार्ट का उपयोग करने से सिंड्रोमिक दृष्टिकोण तुरंत पहुँच और
मूल्य-प्रभावित और दक्षतापूर्ण उपचार देता है।
मुख्य संदेश के लिए सहायक सूचनाएँ: 1
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