एचआईवी/एडस् मुख्य संदेश-6

 
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मलेरिया
एचआइवी/ एड्स
जख्म से बचाव
आपदा और आपात स्थिति
सारांश

इस बीमारी के संक्रमण और फैलाव से कैसे बचाव किया जा सकता है, इसके बारे में उनसे बात कर के, साथ ही पुरुषों और महिलाओं को कंडोम के प्रयोग का सही तरीका बता कर, माता-पिता एवं शिक्षक एच.आई.वी/एड्स से बचाव करने के लिये युवाओं की मदद कर सकते हैं।

युवाओं को एच.आई.वी/एड्स के खतरे के बारे में समझाना आवश्यक है। माता-पिता, शिक्षक, स्वास्थ्य कर्मचारी, अभिभावक या समुदाय के जाने-माने व्यक्ति युवाओं का मार्ग-दर्शन कर सकते हैं। ये लोग युवाओं को एच.आई.वी /एड्स और यौन जनित संक्रमण और अनचाहे गर्भ के बारे में सतर्क कर सकते हैं।

युवाओं के साथ यौन-विषयक मुद्दों पर बातचीत करने में संकोच हो सकता है। स्कूली छात्रों से इस बारे में बातचीत आरंभ करने के लिये यही पूछना काफी है कि उन्होंने एच.आई.वी /एड्स के बारे में क्या सुना है। यदि उनके द्वारा बताई गई कोई भी जानकारी गलत निकले तो वहीं से उन्हें सही बातें समझाने का अवसर ले लें। युवाओं से बातें करना और उन्हें सुनना बहुत ही आवश्यक है। यदि अभिभावक वार्तालाप करने में संकोच का अनुभव करें तो, वह शिक्षक या अध्यापक से, रिश्तेदार या कोई ऐसा जिससे संवेदनशील मुद्दों पर बात की जा सकती हो या बच्चे को ढंग से समझाना जिसे आता हो।

युवाओं को बताया जाना चाहिये कि एच.आई.वी /एड्स का कोई टीका नहीं है और यह एक लाइलाज बीमारी है। उन्हें यह बताना आवश्यक है कि इस बीमारी से बचाव ही केवल एकमात्र सुरक्षित रास्ता है। युवाओं को सेक्स के लिये इन्कार करना भी आना चाहिये।

बच्चों को यह समझाने की आवश्यकता है कि जो बच्चे या वयस्क लोग एच.आई.वी से संक्रमित हैं उनसे सामाजिक संपर्क रखने से वे संक्रमित नहीं होंगे।

एच.आई.वी /एड्स के साथ जीनेवाले लोगों को देखभाल और मदद की आवश्यकता होती है। युवा उन्हें सहानुभूति देकर मदद कर सकते हैं।

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