एचआईवी/एडस् मुख्य संदेश-4
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यौन संबंध द्वारा एच.आई.वी/एड्स के संक्रमण का खतरा कम हो सकता है, यदि लोग यौन संबंध न बनायें, यौन संबंध स्थापित करने वाले सहयोगियों की संख्या कम करें, यदि असंक्रमित पार्टनर ही आपस में यौन संबंध स्थापित, या लोग सुरक्षित यौन संबंध स्थापित करें। कंडोम का सही और निरंतर प्रयोग ही एड्स के संक्रमण को फैलने से रोक कर जीवन को बचाया जा सकता है।
लुब्रिकेशन के साथ आनेवाले कंडोम (स्लिपरी लिक्विड या जैल) के फटने की कम आशंका होती है। यदि कंडोम ठीक तरह से लुब्रिकेटेड (चिकनाईयुक्त) नहीं है तो, ‘वॉटर बेस्ड’ लुब्रिकेंट (चिकनाई), जैसे सिलिकॉन या ग्लिसरीन, का प्रयोग किया जा सकता है। यदि ऐसे लुब्रिकेंट उपलब्ध नहीं हैं तो, लार (मुँह की लार) का प्रयोग किया जा सकता है। तेल या पेट्रोलियम से बने हुये लुब्रिकेंट (खाना पकाने का तेल, मिनरल या बेबी ऑयल, पेट्रोलियम जैलियाँ जैसे वैसलीन, अधिकतर लोशन्स्) का प्रयोग कभी नहीं करना चाहिये क्योंकि ये कंडोम को क्षति पहुँचाते हैं। अच्छी चिकनाई युक्त कंडोम गुदा-मैथुन के दौरान बचाव के लिये आवश्यक है।
शिश्न प्रवेश रहित यौनक्रिया एच.आई.वी के संक्रमण से बचाव करने का एक और सुरक्षित तरीका है (यद्यपि यह भी सारे यौन जनित संक्रमण से पूरी तरह बचाव नहीं कर पाता)। पुरुषों के कंडोम का सुरक्षित विकल्प महिलाओं का कंडोम है। महिलाओं का कंडोम एकदम मुलायम, लूज-फिटिंग (ढीला) पॉलीयूरेथिन झिल्ली होती है जिसे योनिमार्ग के अंदर रखा जाता है। इसके दोनों ही सिरों में मुलायम रिंग होते हैं। बंद सिरे का रिंग इस साधन को सेक्स के समय योनि के अंदर डाल कर सही जगह पकड़ कर रखता है। अन्य रिंग युक्त सिरा योनि के बाहर रहता है और लेबिया को थोड़ा-सा ढक देता है। सेक्स आरंभ होने से पहले, महिला अपना कंडोम अंगुलियों से अंदर डालती है। पुरुषों के कंडोम से बिल्कुल भिन्न, महिला कंडोम किसी भी चिकनाई के साथ डाला जा सकता है – चाहे वह लुब्रिकेंट वॉटर बेस्ड, ऑयल बेस्ड या पेट्रोलियम जैली बेस्ड क्यों न हो, क्योंकि यह पॉलीयूरेथिन से बना हुआ होता है। अल्कोहोल पीना या मादक द्रव्य लेना इसके परिणाम को प्रभावित करता है। जो एड्स के खतरे को जानते हैं वे शायद अल्कोहोल पीने या कोई भी मादक द्रव्य लेने के बाद सुरक्षित सेक्स का महत्व भूल सकते हैं। |
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