एचआईवी/एडस् मुख्य संदेश-2
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सभी लोग, बच्चों समेत, एच.आई.वी /एड्स के खतरे के दायरे में हैं। इस खतरे को कम करने के लिये हर एक को इस रोग की जानकारी और कंडोम तक पहुँच आसान बनाने की आवश्यकता है। एच.आई.वी /एड्स से ग्रसित बच्चे और किशोरों को सामान्य शिशु रोग, जो घातक हो सकते हैं, उनसे बचाने के लिये अच्छा पोषण, टीकाकरण और नियमित स्वास्थ्य देखभाल की आवश्यकता है। यदि बच्चा संक्रमित हैं, तो उसकी माता या पिता के संक्रमित होने की बहुत अधिक संभावना है। घर पर आकर देखभाल (होम केयर) करने की आवश्यकता पड़ सकती है। उन देशों में जहाँ एच.आई.वी संक्रमण दर उच्च है, बच्चों के संक्रमित हो जाने का ही खतरा नहीं होता तथापि एच.आई.वी /एड्स के कारण उनके परिवारों और समुदायों पर होने वाले परिणामों का प्रभाव भी उन पर पड़ता है।
एच.आई.वी /एड्स से प्रभावित परिवारों को साथ रखने के प्रयास किये जाने चाहिये। अनाथ बच्चों को किसी संस्था में रखने से भी ये बच्चे जल्दी से संभल जाते हैं। बहुत थोड़े युवाओं को उनकी आवश्यकता के अनुसार उचित और सही जानकारी प्राप्त होती है। इससे पहले कि स्कूल जानेवाले बच्चे यौन संबंध स्थापित करने के कार्य में सक्रिय हो जायें उन्हें एच.आई.वी /एड्स के बारे में उचित जानकारी देना आवश्यक है। इस आयु में दी गई ऐसी जानकारी का परिणाम यह होता कि वे बहुत ही जल्द इसे सीखकर व्यवहार में अपना लेते हैं। जो बच्चें संस्था में, सड़कों पर, या रिफ्यूजी कैंपों में रहते हैं, उन्हें भी अन्य बच्चों से एच.आई.वी/एड्स के संक्रमण का खतरा होता है। उन्हें भी सहारा दिये जाने की आवश्यकता होती है। |
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