आपदा व आपात स्थिति मुख्य संदेश-3

 
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आपदा और आपात स्थिति
सारांश

विवाद इत्यादि की स्थिति में ये सबसे सही होगा कि बच्चों की देखभाल उनके माता- पिता या फिर घर का कोई वयस्क करे। इससे उनमें सुरक्षा की भावना आती है।

किसी भी प्रकार की आपात स्थिति में, ये सरकार का कर्तव्य है, अथवा संयुक्त राष्ट्र के प्रतिनिधियों का कर्तव्य है कि वे इस बात का ध्यान रखें कि बच्चे उनके माता-पिता अथवा अभिभावकों से अलग ना हो

यदि किसी कारण से बच्चे अलग होते हैं, तब ये सरकार अथवा अन्य प्रतिनिधियों का कर्तव्य है कि ऐसे बच्चों का विशेष ख्याल रखा जाए। सरकार व अन्य प्रतिनिधियों का ये भी कर्तव्य बनता है कि वे बच्चों के माता-पिता की खोज करें व उनके पास बच्चों के भेजने की व्यवस्था करें।

आपात स्थिति में अलग हुए बच्चों को अंतरिम राहत पहुंचानी ज़रूरी है। जब तक बच्चा अपने परिवार अथवा गोद लिये हुए परिवार तक नही पहुंच जाता, उसकी सुरक्षा व देखभाल करना सरकार का कर्तव्य है।

वे बच्चे जो किसी आपात स्थिति के कारण अपने माता-पिता से अलग हो गये हैं, उन्हें अनाथ नहीं कहा जा सकता तथा वे गोद लिये जाने के लिये उपलब्ध नही होंगे। जब तक कि बच्चे के माता-पिता की मृत्यु नहीं हो जाती अथवा उसकी पुष्टि नहीं होती, बच्चे को उसके नज़दीकी रिश्तेदार के यहां रखा जाना चाहिये। यदि बच्चे के माता-पिता या अभिभावक नहीं खोजे जा सके हैं, तब बेहतर होगा कि बच्चे को नागरिक समाज के किसी परिवार में गोद दे दिया जाए। यदि यह भी संभव नहीं हो, तभी बच्चे को किसी अन्य समाज अथवा नागरिकता वाले परिवार के सदस्यों द्वारा गोद लिया जा सकता है।

यदि कोई परिवार हिंसा के दौर से गुज़रा हो, ऐसे में घर वापस जाना बड़ा दुखदायी होता है। शरणार्थी बच्चों को नवीन भाषा और संस्कृति को सीखने का नवीन भार भी वहन करना पडता है।

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