हैजा मुख्‍य संदेश- 6

 
जन्म का समय
सुरक्षित मातृत्व
बाल विकास और आरंभिक अभ्यास
स्तनपान
पोषण और विकास
टीकाकरण
आंत्रशोथ
सर्दी, जुकाम और अधिक गंभीर बीमारियाँ
स्वच्छता
मलेरिया
एचआइवी/ एड्स
जख्म से बचाव
आपदा और आपात स्थिति
सारांश

अतिसार से बचाव के लिये सारे मल शौचालय में फेंक दिया जाना चाहिये या जमीन में गाड़ देना चाहिये।

यदि मल का स्पर्श (या संपर्क) पीने के पानी, खाद्य पदार्थ, हाथ, बर्तन या खाना पकाने की जगहों (या सतहों) से होने पर बच्चे और वयस्क दोनों के शरीर में डायरिया के रोगाणु प्रवेश कर सकते हैं। जो मक्खियाँ मल के ऊपर बैठती हैं वही फिर भोजन पर बैठती हैं और इस तरह डायरिया फैलानेवाले रोगाणुओं को स्थानांतरित करती हैं। खाने की वस्तुएँ और पीने का पानी ढक कर रखने से इनका मक्खियों से बचाव हो सकता है।

दुधमुँहे और छोटे बच्चों का मल भी रोगाणु फैलाता है इसीलिये वह भी ख़तरनाक है। यदि बच्चे शौचालय का प्रयोग किये बिना ही मल त्याग करें, तो उनका मल तुरंत साफ कर देना चाहिये और शौचालय में बहा देना या ज़मीन में गाड़ देना चाहिये। शौचालयों और शौच कूपों को साफ रखने से रोगाणुओं के फैलने से बचाव होता है। यदि शौचालय या शौचकूप उपलब्ध न हों, तो बच्चे और बड़े दोनों को ही घर, रास्ते, जल आपूर्ति स्थान और बच्चों के खेलने का मैदान जैसी जगहों से दूर जाकर शौच करना चाहिये और उनका मल ज़मीन की एक परत के नीचे दबा दिया जाना चाहिये।

यदि कुछ समुदायों के पास शौचकूप या शौचालयों की सुविधा नहीं है, तो ऐसे समुदायों को एकत्रित होकर ऐसी सुविधाओं का निर्माण करनी चाहिये। पानी के स्रोतों को सदैव मानव या पशुओं के मल से सुरक्षित रखा जाना चाहिये।

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