बाल विकास और शुरुआती सीख मुख्य संदेश -5

 
जन्म का समय
सुरक्षित मातृत्व
बाल विकास और आरंभिक अभ्यास
स्तनपान
पोषण और विकास
टीकाकरण
आंत्रशोथ
सर्दी, जुकाम और अधिक गंभीर बीमारियाँ
स्वच्छता
मलेरिया
एचआइवी/ एड्स
जख्म से बचाव
आपदा और आपात स्थिति
सारांश

माता-पिता और बच्चों की देखभाल करने वालों को खतरे के उन निशानों को जानना चाहिए जो दर्शाते हैं कि बच्चों की बढ़त और विकास डगमग है।

माता-पिता और देखभाल करने वालों को उन अहम पड़ावों को जानने की जरूरत है, जो दर्शाते हैं कि बच्चे का विकास सामान्य रूप से हो रहा है। उन्हें यह भी जानने की जरूरत है कि शारीरिक या मानसिक रूप से कमजोर बच्चों को कब मदद की जानी है और उन्हें देखभाल और प्यार का माहौल किस तरह दिया जाना है।

सभी बच्चे एक जैसे तरीकों से बढ़ते और विकसित होते हैं, लेकिन हरेक बच्चे के विकास की अपनी गति होती है।

यह गौर करें कि बच्चा स्पर्श, घ्वनि और दृश्यों पर क्या प्रतिक्रिया करता है। माता-पिता विकास से जुड़ी दिक्कतों या अक्षमता की पहचान कर सकते हैं। अगर बच्चा धीमी गति से विकसित हो रहा है तो माता-पिता और देखभाल करने वाले बच्चों के साथ अतिरिक्त समय गुजार कर, खेल कर और उससे बातें कर, और बच्चे की मालिश कर मदद कर सकते हैं।

उत्तेजित करने और ध्यान खींचे जाने के बावजूद अगर बच्चा बेअसर रहता है तो माता-पिता और देखभाल करने वालों को किसी प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी से मदद लेने की जरूरत है। अपंग बच्चों की क्षमताओं के पूर्ण विकास में मदद के लिए शुरुआती पहल बहुत जरूरी है। बच्चे की क्षमता अधिक से अधिक विकसित करने के लिए माता-पिता और देखभाल करने वालों को बढ़ावा दिये जाने की जरूरत है।

अपंगता का शिकार लड़का या लड़की को कुछ ज्यादा दुलार दिये जाने और एहतियात बरते जाने की जरूरत होती है। सभी बच्चों की तरह विकलांग बच्चों के लिए भी जन्म के समय या उसके तुरंत बाद जन्म पंजीकरण, मां के दूध, टीकाकरण, पौष्टिक भोजन तथा बदसलूकी और हिंसा से बचाव की जरूरत है। अपंग बच्चों को खेलने और दूसरे बच्चों से घुलने-मिलने के लिए बढ़ावा दिया जाना चाहिए।

जो बच्चा खुश नहीं हैं या जज्बाती व परेशानियों से घिरा हुआ है, उसका बर्ताव गैर मामूली हो सकता है। मिसाल के तौर पर अचानक गैर दोस्ताना, दुखी, आलसी, असहयोगी और शरारती हो जाना, अक्सर रोना, दूसरे बच्चों के प्रति हिंसक हो जाना, दोस्तों के साथ खेलने के बजाय अकेले रहना या अचानक रोजमर्रा के कामों या पढ़ाई-लिखाई में दिलचस्पी न लेना, भूख और नींद में कमी आ जाना।

अभिभावकों को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए कि वे बच्चों से बात करें और उन्हें सुनें। समस्या अगर दूर नहीं होती हो, तो शिक्षक या स्वास्थ्य कार्यकर्ता की मदद लें।

अगर बच्चे को दिमागी या जज्बाती परेशानी है या उसके साथ बदसलूकी हुई हो तो अगली मुश्किलों से बचाने के लिए उसे सलाह दी जानी चाहिए।

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आगे दी गई दिशा-निर्देश माता-पिता को यह जानकारी देती है कि बच्चे कैसे विकसित होते हैं। सभी बच्चों की बढ़त और उनके विकास में अंतर होता है। धीमी प्रगति सामान्य हो सकती है या जरूरत से कम पोषण, खराब स्वास्थ्य, उत्तेजना का अभाव या कहीं ज्यादा गम्भीर दिक्कतों के कारण हो सकती है। बच्चे की प्रगति के बारे में माता-पिता प्रशिक्षित स्वास्थ्य कार्यकर्ता या शिक्षक से बात करने की इच्छा कर सकते हैं।

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बच्चे कैसे विकसित होते हैं
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एक माह तक

बच्चा करने में सक्षम हों:

  • गाल या मुंह को सहला रहे हाथों की ओर सिर घुमायें
  • मुंह तक दोनों हाथ ले जायें
  • परिचित आवाज और ध्वनियों की ओर पलटें
  • मां का दूध पियें और मां का स्तन अपने हाथों से छुएं

माता-पिता और देखभाल करनेवालों को सलाह

  • जन्म के एक घंटे के भीतर मां से करीबी बने और मां का दूध मिले
  • बच्चे को सीधा उठाने पर उसके सिर को सहारा दें
  • बच्चे की अक्सर मालिश करें और उसे गोद में लें
  • बच्चे को हमेशा करीने से गोद में लें, भले ही आप थके और परेशान हों
  • बार-बार बच्चे को मां का दूध पिलायें, कम से कम चार घंटे पर
  • जितना संभव हो सके, बच्चे से बात करें, उसके सामने पढ़ें और गाना गायें
  • जन्म के छह सप्ताह बाद नवजात शिशु के साथ स्वास्थ्य कार्यकर्ता से मिलें

निम्न खतरनाक संकेत, जिन पर ध्यान दिया जाना चाहिए-

  • ठीक से मां का दूध न पीना या पीने से मना करना
  • हाथ और पैर का कम चलना
  • ऊंची आवाज या तेज रोशनी पर कम ध्यान देना या बेअसर हो जाना
  • बिना किसी कारण के लंबे समय तक रोना
  • उल्टी और दस्त करना, जो शरीर में पानी की कमी पैदा कर सकता है


छह माह तक

बच्चा करने में सक्षम हों

  • पेट के बल लेटने पर सिर और सीना उठाये
  • झूलती चीजों पर लपके
  • चीजों को पकड़े और हिलाये
  • दोनों तरफ करवट लें
  • सहारे के जरिये बैठे
  • हाथ और मुंह से चीजों को समझे
  • आवाजों और चेहरों के भावों की नकल उतारने की शुरुआत करे
  • अपना नाम और परिचित चेहरों को देख कर ध्यान दें

माता-पिता और देखभाल करनेवालों को सलाह

  • बच्चे को साफ-सुथरे, समतल और सुरक्षित जगह पर लिटायें ताकि वह मजे से घूम-फिर सके और चीजों तक पहुंच सके।
  • बच्चे को बैठने के लिए इस तरह टेक दें या उसे थामें कि वह अपने आसपास की हलचलों को देख सकें
  • दिन हो या रात, भूख लगने पर बच्चे को मां का दूध पिलाना जारी रखें और बाकी भोजन देने की भी शुरुआत करें; 6-8 माह तक दिन में दो बार, 8-12 माह तक तीन-चार बार
  • जितना संभव हो बच्चे के साथ बात करें, पढ़ें या गाना गायें

निम्न खतरनाक संकेत, जिन पर ध्यान दिया जाना चाहिए

  • पैरों में कड़ापन या उसे चलाने में परेशानी
  • सिर को लगातार हिलाना (यह कान में फैलनेवाले रोग का लक्षण हो सकता है और अगर इलाज न किया जाये तो बहरेपन की ओर बढ़ सकता है)
  • आवाजों, परिचत चेहरों या मां के स्तनों पर कम ध्यान देना या बिल्कुल बेअसर हो जाना
  • मां का दूध या दूसरे भोजन के लिए मना करना


12 माह तक

बच्चा करने में सक्षम हो

  • बिना किसी सहारे के बैठे
  • हाथ और घुटने के बल चलें और उठ खड़ा होने लगे
  • सहारा पा कर कदम बढ़ाये
  • शब्दों और आवाजों की नकल उतारने की कोशिश करें तथा मामूली अनुरोध पर गौर करें
  • खेलने और ताली बजाने का मजा लें
  • लोगों का ध्यान खींचने के लिए आवाजों और अदाओं को दोहरायें
  • अंगूठे और उंगली से चीजों को उठाये
  • चम्मच और कप जैसी चीजों को पकड़ने तथा खुद से भोजन करने की कोशिश की शुरुआत करें

माता-पिता और देखभाल करनेवालों को सलाह

  • चीजों की ओर इशारा करें और उनके नाम लें। जब-तब बच्चे से बात करें और उसके साथ खेलें
  • भोजन के वक्त का इस्तेमाल परिवार के सभी सदस्यों के साथ मेलजोल बढाने में करें
  • अगर बच्चे का विकास धीमा हो या उसमें कोई शारीरिक अक्षमता है तो उसकी क्षमताओं पर जोर दें और उसे कुछ ज्यादा बढ़ावा दें और मेलजोल बढ़ायें
  • कई घंटे तक बच्चे को एक जैसी हालत में न छोड़े
  • किसी अनहोनी को रोकने के लिए बच्चे की जगह, जितना संभव हो सके, सुरक्षित बनायें
  • मां का दूध पिलाना जारी रखें और सुनिश्चित करें कि बच्चे को भरपूर भोजन मिले और उसमें परिवार के विभिन्न भोजन भी शामिल हों
  • चम्मच/कप से भोजन करने में बच्चे के प्रयास में मदद करें
  • यह तय करें कि बच्चे का पूरा टीकाकरण हो और सुझाये गये सभी पौष्टिक तत्वों की उसे खुराक मिलें

निम्न खतरनाक संकेत, जिन पर ध्यान दिया जाना चाहिए

  • पुकारने पर बच्चा कोई आवाज न निकाले
  • हिलती-डुलती चीजों पर गौर न करें
  • बच्चा उदासीन हो और देखभाल करने वाले से बेपरवाह हो
  • बच्चे को भूख न लगे या खाने से मना करें


दो साल तक

बच्चा करने में सक्षम हो

  • चले, चढ़े और दौड़
  • नाम लेने पर चीजों या तस्वीरों की तरफ इशारा करें (जैसे- नाक, आंख वगैरह)
  • कई शब्द एक साथ बोले (लगभग 15 माह से)
  • मामूली हिदायतों को लागू करे
  • पेंसिल या कोयले से रेखाएं खींचे
  • सरल कहानियों और गानों का आनंद ले
  • दूसरे के व्यवहार की नकल उतारे
  • खुद से भोजन करने की शुरुआत करे

माता-पिता और देखभाल करनेवालों को सलाह

  • बच्चे के सामने पढ़े, गायें और उसके साथ खेलें
  • बच्चे को खतरनाक चीजों से दूर रहने की सीख दें
  • बच्चे के साथ आम तरीके से बात करें, खुद बच्चा न बन जायें
  • मां का दूध पिलाना जारी रखें और यह सुनिश्चित करें कि बच्चे को भरपूर भोजन मिले और उसमें परिवार में खाये जा रहे विभिन्न भोजन भी शामिल हों
  • बच्चे को खाने के लिए प्रोत्साहित करें, लेकिन जोर न डालें
  • सरल तौर-तरीके बतायें और जायज उम्मीद करें
  • बच्चे की उपलब्धियों की तारीफ करें

निम्न खतरनाक संकेत, जिन पर ध्यान दिया जाना चाहिए

  • दूसरों से बेपरवाह रहे
  • चलते हुए खुद को साधने में परेशानी महसूस करे (प्रशिक्षित स्वास्थ्य कार्यकर्ता से मिलें)
  • चोट लगे और व्यवहार में बेवजह बदलाव आये (खास तौर पर अगर बच्चे की देखभाल किसी दूसरे के जिम्मे है)
  • भूख की कमी हो


तीन साल तक

बच्चा करने में सक्षम हो

  • आसानी से चले, दौड़े, मारे और कूदे
  • इशारा करने पर चीजों और तस्वीरों को समझे और उसकी पहचान करे
  • दो या तीन शब्दों के वाक्य बनाये
  • अपना नाम और अपनी उम्र बताये
  • रंगों का नाम ले
  • गिनती समझे
  • चीजों को खेलने का जरिया बनाये
  • खुद से भोजन करे
  • लगाव जाहिर करे

माता-पिता और देखभाल करनेवालों को सलाह

  • बच्चे के साथ किताब पढ़े और तस्वीरों पर बात करें
  • बच्चे को कहानियां सुनायें और उसे कविताएं और गीत सिखायें
  • बच्चे को भोजन के लिए उसकी थाली-कटोरी दें
  • बच्चे को खाने के लिए बढ़ावा देना जारी रखें और बच्चे के मुताबिक भोजन के लिए उसे पूरा समय दें
  • बच्चे को कपड़ा पहनने, हाथ धोने और शौचालय का इस्तेमाल सीखने में मदद करें

निम्न खतरनाक संकेत, जिन पर ध्यान दिया जाना चाहिए

  • खेल में दिलचस्पी न लेना
  • बार-बार गिरना
  • छोटी चीजों को साधने में दिक्कत होना
  • मामूली बातों को न समझ पाना
  • कई शब्दों को जोड़ कर बोलने में समर्थ न होना
  • भोजन में कम दिलचस्पी या कोई दिलचस्पी न लेना


पांच साल तक

बच्चा करने में सक्षम हो

  • चलने में तालमेल बनाये
  • पूरा वाक्य बोले और कई शब्दों का इस्तेमाल करे
  • एक-दूसरे से उलट चीजों को समझे ; जैसे- मोटा और पतला, लंबा और ठिगना
  • दूसरे बच्चों के साथ खेले
  • खुद से कपड़े पहने
  • आसान सवालों का जवाब दे
  • 5 से 10 चीजों की गिनती करे
  • अपने हाथ साफ करे

माता-पिता और पालनेवालों को सलाह

  • बच्चे को सुनें
  • बच्चों के साथ अक्सर घुले-मिलें
  • अगर बच्चा हकलाता है तो उसे और धीमी रफ्तार में बोलने की सलाह दें
  • कहानियां पढ़े और सुनायें
  • बच्चे को खेलने और छानबीन के लिए प्रोत्साहित करें

निम्न खतरनाक संकेत, जिन पर ध्यान दिया जाना चाहिए

  • खेल में बच्चों की भागीदारी पर गौर करें, अगर बच्चा डरा हुआ, गुस्से में या हिंसक है तो यह उसकी जज्बाती दिक्कतों या उसके साथ हुई बदसलूकी का लक्षण हो सकता है।


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