राष्ट्रीय मृदा-स्वास्थ्य एवं ऊर्वरता प्रबंधन परियोजना

उद्देश्य

निम्नलिखित व्यापक उद्देश्यों के साथ यह योजना लागू की जा रही है:

  • मृदा-स्वास्थ्य तथा इसकी ऊर्वरता बढ़ाने हेतु द्वितीयक एवं सूक्ष्म पोषक तत्वों एवं जैविक खादों तथा जैव ऊर्वरकों सहित रासायनिक ऊर्वरकों के विवेकपूर्ण प्रयोग के जरिए एकीकृत पोषण प्रबंधन (आईएनएम) की सुविधा प्रदान करना और उसे बढ़ावा देना।
  • मृदा परीक्षण सुविधाओं को मजबूत करना तथा किसानों को मृदा उत्पादकता एवं आर्थिक लाभ प्राप्ति हेतु मृदा परीक्षण आधारित अनुशंसाएँ करना।
  • हरित खाद के जरिए मृदा-स्वास्थ्य में सुधार करना।
  • ऊर्वरता तथा फसल उत्पादकता में वृद्धि हेतु अम्लीय अथवा क्षारीय भूमि में सुधार लाकर, कृषि में प्रयुक्त करने के लिए मृदा सुधारों को बढ़ावा देना और इसकी सुविधा उपलब्ध कराना।
  • ऊर्वरक प्रयोग की दक्षता बढ़ाने हेतु सूक्ष्म पोषक तत्त्वों के प्रयोग को बढ़ावा देना।
  • ऊर्वरकों के संतुलित प्रयोग के लाभों के संदर्भ में किसानों के खेतों में प्रदर्शन सहित प्रशिक्षण और प्रदर्शन के जरिए एसएलटी/प्रसार कर्मचारियों तथा किसानों की कुशलता एवं ज्ञान तथा उनके क्षमता-निर्माण को उन्नत बनाना।
  • “ऊर्वरक नियंत्रण आदेश” को प्रभावी तरीके से लागू किये जाने हेतु राज्य सरकारों के क्रियान्वयन अधिकारियों को प्रशिक्षित करने सहित फर्टिलाइजर क्वालिटी कंट्रोल सुविधाओं को बल प्रदान कर ऊर्वरकों की गुणवत्ता-नियंत्रण सुनिश्चित करना।
  • ऊर्वरकों के संतुलित प्रयोग को बढ़ावा देने हेतु अनेक क्रियाकलापों तथा एसएलटी/ऊर्वरक जाँच प्रयोगशाला की स्थापना तथा उन्नयन हेतु वित्तीय सहायता प्रदान करना।


अंगभूत अवयव

योजना के अंगीभूत अवयवों में शामिल है

i. मृदा परीक्षण प्रयोगशालाओं को मजबूत करना

  • सूक्ष्म पोषक तत्त्वों के विश्लेषण हेतु 11वीं पंचवर्षीय योजना के दौरान 500 नये मृदा परीक्षण प्रयोगशालाओं तथा 250 चलंत मृदा परीक्षण प्रयोगशालाओं की स्थापना।
  • सूक्ष्म पोषक तत्त्वों के विश्लेषण हेतु वर्तमान में कार्यरत 315 राज्य मृदा परीक्षण प्रयोगशालाओं को सबल बनाना।
  • मृदा परीक्षण प्रयोगशालाओं के कर्मचारियों/ प्रसार अधिकारियों/किसानों तथा क्षेत्र प्रदर्शन/कार्यशाला इत्यादि के द्वारा क्षमता निर्माण करना।
  • ऊर्वरक के संतुलित प्रयोग के लिए आँकड़ा कोष का निर्माण करना जो स्थल के लिए विशेषीकृत है।
  • प्रत्यक्ष प्रदर्शन के जरिए प्रत्येक मृदा परीक्षण प्रयोगशाला द्वारा 10 गाँवों को गोद लेना।
  • ग्लोबल पोजिशनिंग प्रणाली का प्रयोग कर जिले का डिजिटल मृदा नक्शा तैयार करना तथा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद्/ राज्य कृषि विश्वविद्यालयों द्वारा मृदा ऊर्वरता निगरानी तंत्र तैयार करना।

ii. एकीकृत पोषण प्रबंधन के प्रयोग को बढ़ावा

  • जैव ऊर्वरकों के प्रयोग को प्रोत्साहन
  • अम्लीय भूमि में मृदा सुधारों (चूना/क्षारीय स्लैग) को बढ़ावा।
  • सूक्ष्म पोषक तत्त्वों का वितरण तथा उनके प्रयोग को प्रोत्साहन।

iii. ऊर्वरक गुणवत्ता नियंत्रण प्रयोगशालाओं को सबल करना।

  • 63 कार्यरत राज्य ऊर्वरक गुणवत्ता नियंत्रण प्रयोगशालाओं का उन्नयन।
  • 20 नये ऊर्वरक गुणवत्ता नियंत्रण प्रयोगशालाओं का राज्य सरकारों द्वारा स्थापना।
  • निजी/सहकारी क्षेत्र के अंतर्गत सलाहकारी उद्देश्य से 50 ऊर्वरक परीक्षण प्रयोगशालाओं की की स्थापना।


वित्त आवंटन

11वीं पंचवर्षीय योजना के दौरान विभिन्न अंगीभूत घटकों के लिए कुल 429.85 करोड़ रुपये का आवंटन, योजना के क्रियान्वयन हेतु स्वीकृत किया गया है।



क्रियान्वयन प्राधिकार

कृषि एवं सहकारिता विभाग (डीएसी), कृषि मंत्रालय



स्रोत: http://agricoop.nic.in/


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